
मध्य प्रदेश में अश्वगंधा की खेती किस तरह से करें, जानें पूरी जानकारी : किसान भाइयों अश्वगंधा एक बहुत ही बढ़िया औषधि फसल है जिसकी मांग आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में और हर्बल उत्पादन बनाने में इसकी बहुत ज्यादा जरूरत पड़ती है और आपको बताते चलो की मध्य प्रदेश भारत में अश्वगंधा उत्पादन के प्रमुख राज्यों में से एक है इसके अंतर्गत नीमच मंदसौर रतलाम उज्जैन देवास राजगढ़ विदिशा के आसपास वाले जो शहर है यहां के जो गांव है वहां पर किसान भाई इसकी खेती बाड़ी पैमाने पर करते हैं.
मध्य प्रदेश में अश्वगंधा की खेती किस तरह से करें, जानें पूरी जानकारी
अब इसके लिए किसान भाइयों उपयुक्त जलवायु की आवश्यकता होती है तो अश्वगंधा की खेती शुष्क और गर्म जलवायु में सबसे अच्छी होती है इसके लिए 20 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उपयुक्त होना जरूरी होता है अधिक वर्षा या खेत में पानी भरने से पौधे का वृद्धि प्रभावित हो सकता है और इस से जेड खराब हो सकती है.
किसान भाइयों अब इसके बाद इसके खेती करने के लिए उपयुक्त मिट्टी की भी बहुत ज्यादा आवश्यकता होती है तो आपको बताते चलो की इसकी जो खेती करने के लिए मिट्टी की जो जरूरत होती है उसके लिए हल्के से मध्यम व काली मिट्टी की जरूरत होती है बलुई दोमट या दोमट मिट्टी की जरूरत होती है और अच्छी जल निकासी वाली भूमि भी होनी चाहिए और उसमें फ 6.5 से लेकर 8.0 तक होना अनिवार्य होता है इसके अलावा किसान भाइयों आपको बताता चालू की भरी और पानी रोकने वाली मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए.
फसल के लिए कौन सी मिट्टी चाहिए
किसान भाइयों अब बात कर लेते हैं इसमें खेत की तैयारी की किसान भाई इस फसल की खेती करने के लिए खेत किस तरह से तैयार कर सकता है सबसे पहले खेती गहरी जुताई करनी चाहिए उसके बाद दो से तीन बार देसी या कल्टीवेटर चलकर मिट्टी को भरपूर बना ले उसके बाद अंतिम झुठई के समय 4 से 5 टन प्रति एकड़ अच्छी साड़ी हुई गोबर की खाद भी डालें खेत समतल होना चाहिए ताकि वर्षा का पानी किसान भाइयों के खेत में रुकना सके अगर पानी रुकेगा तो उसमें फिर फसल के खराब होने के बहुत ज्यादा चांस हो जाते हैं.
अब किसान भाइयों अब मैं इसमें बात आती है बीच की मात्रा की किसान भाइयों को एक एकड़ में कितना बैच डालना चाहिए तो किसान भाइयों इसमें ढाई किलोग्राम तक एक एकड़ में 20 डालता है और अगर हम प्रति हेक्टेयर की बात करते हैं तो 5 से 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर में डालता है.
कितनी दूरी पर करें खेती
किसान भाइयों अब हम बात कर लेते हैं कि इसके बुवाई की विधि किस तरह से करनी चाहिए तो किसान भाइयों एक कतार से दूसरी कतार तक आपको 30 सेंटीमीटर की दूरी रखना है पौधे से पौधे की दूरी को 10 से 15 सेंटीमीटर दूर रखना है और जो बीच की गहराई है वह दो से तीन सेंटीमीटर ही होनी चाहिए.
अब किसान भाइयों इसके अंदर आपको सिंचाई करने की जरूरत पड़ती है तो किसान भाइयों आपकी जानकारी के लिए बताता चालू की अश्वगंधा मुख्य रूप से वर्ष पर आधारित फसल होती है सामान्य वर्षा होने पर अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन किसान भाइयों अगर लंबे समय तक वर्षा नहीं हो रही है तो आप 1 से 2 हल्की सिंचाई भी कर सकते हैं और खेत में पानी बिल्कुल रुकना नहीं चाहिए आप इस बात का जरूर ध्यान रख रहे रखें.
अब हमने यहां पर फसल की सिंचाई की बात कर ली है लेकिन किसान भाइयों जब हमारी फसल बड़ी हो जाती है तो हमें रोग और किट का नियंत्रण करना भी बहुत ज्यादा जरूरी होता है अगर हम इस पर नियंत्रण नहीं करेंगे तो वह हमारी फसल को पूरी तरह से खराब कर सकते हैं तो इसके लिए किसान भाइयों आपको दवाइयां का उपयोग करना चाहिए.
की अवधि कितने दिनों में तैयार हो जाती है अश्वगंधा की फसल लगभग 150 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है मध्य प्रदेश में सामान्य दिसंबर से जनवरी के बीच खुदाई की जाती है. किसान भाइयों खुदाई कब करनी चाहिए इस फसल के लिए तो आपको बताता चालू की जब पौधों की पत्तियां पीली होकर सूखने लगे तब फल लाल हो जाए तब फसल तैयार मानी जाती है तो उसके लिए आपको पौधे को सावधानी से उगाना चाहिए जड़ों की मिट्टी को साफ करना चाहिए
आप 8 से लेकर 10 सेंटीमीटर के टुकड़े में काट लेना चाहिए छाया में अच्छी तरह से इसको सुख देना चाहिए उत्पादन की बात करें किसान भाइयों उसके अंदर तो सुखी जड़ 3 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ की निकलती है और इसका जो बीच होता है वह 40 से 60 किलोग्राम प्रति एकड़ तक निकलता है.
किसान भाइयों हमने आपको इस आर्टिकल के अंदर संपूर्ण जानकारी दे दी गई है किसान भाइयों मैं आपसे उम्मीद करता हूं कि यह जानकारी आपको बहुत ही अच्छी लगी होगी क्योंकि हमने इसके अंदर अश्वगंधा की सारी जानकारी दे दी है और हमारे किसान भाइयों को संपूर्ण जानकारी इस आर्टिकल के माध्यम से मिल चुकी है किसान भाइयों अब आप इस तरह से अपने फसल की खेती कर सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं किसान भाइयों अब बात करते हैं कि इस फसल को आप कहां पर भेज सकते हैं तो इस फसल को आप किसान भाइयों नीमच मंडी के अंदर भेज सकते हैं.
नीमच एक ऐसी मंडी है जहां पर उल्टी फसल दे सकते हैं और जो अश्वगंधा है यह औषधि फसल के अंतर्गत ही आता है तो किसान भाइयों जब आपकी फसल पूरी तरह से कंप्लीट हो जाए आप उसे काट ले और जब उसे सुख ले तो आप नीमच मंडी में आकर इसे बड़े अच्छी तरह से भेज सकते हैं और इसका आपको बहुत ही अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं.
इसके अलावा किसान भाइयों आप अश्वगंधा के बीच कॉपी नीमच मंडी में जाकर भेज सकते हैं इसके बीच भी बिकते हैं और इसकी जो जड़ होती है वह भी नीमच मंडी में बहुत ही अच्छी तरह से बिकती है.